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नानख़टाई की कहानी: सूरत की बेकरी से हर घर के डिब्बे तक
नानख़टाई यानी इलायची की ख़ुशबू वाला हमारा प्यारा बिस्किट। लोकप्रिय क़िस्सों के मुताबिक़ इसका जन्म 16वीं–17वीं सदी में सूरत की एक बेकरी में हुआ था — कहानी, नाम और बनाने का तरीक़ा यहाँ।
नानख़टाई आटे, घी, चीनी और इलायची से बना, मुँह में रखते ही भुरभुराकर घुल जाने वाला एक भारतीय शॉर्टब्रेड बिस्किट है, जिसे ऊपर से दरारें पड़ने तक बेक किया जाता है। सूरत से मुंबई और दिल्ली तक की बेकरियों में यह मिलता है, लेकिन लोकप्रिय क़िस्सों के मुताबिक़ इसकी कहानी गुजरात के एक बंदरगाह शहर से शुरू होती है।
नानख़टाई की शुरुआत कहाँ हुई?
सबसे ज़्यादा सुनाई जाने वाली कहानी के अनुसार नानख़टाई का जन्म 16वीं–17वीं सदी में गुजरात के सूरत में हुआ था। उस दौर में सूरत दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक बंदरगाहों में से एक था, और डच व दूसरे यूरोपीय व्यापारी वहाँ बसे हुए थे।
कहानी कहती है कि जब डच व्यापारी सूरत छोड़कर गए, तो उनकी एक बेकरी एक स्थानीय पारसी बेकर — जिनका नाम आमतौर पर फ़रामजी पेस्तनजी दोटीवाला बताया जाता है — ने संभाल ली। ताड़ी के ख़मीर से बनने वाली ब्रेड यूरोपियनों के जाने के बाद स्थानीय लोगों में ज़्यादा नहीं बिकती थी, इसलिए बेकर ने बची हुई ब्रेड को सुखाकर सस्ते में बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे इसी से भारतीय स्वाद के हिसाब से घी वाला, बिना अंडे का बिस्किट बना — आज की नानख़टाई का पूर्वज।
दोटीवाला नाम आज भी सूरत की एक बेकरी से जुड़ा है। बहुत से खान-पान के इतिहासों की तरह यहाँ भी हर सुनाने वाले की बात में थोड़ा फ़र्क़ होता है और लिखित सबूतों से सब कुछ जाँचना मुश्किल है, इसलिए इसे इतिहास की मज़बूत झलक वाली एक प्यारी स्थानीय किंवदंती के रूप में पढ़ना ठीक रहेगा।
"नानख़टाई" नाम का मतलब क्या है?
इस नाम को आमतौर पर दो शब्दों के मेल से समझाया जाता है:
- "नान" — फ़ारसी से, मतलब रोटी / ब्रेड
- "ख़टाई" — अफ़ग़ान/दरी बोली से, मतलब बिस्किट
यानी "नानख़टाई" का मोटा-मोटा अर्थ है ब्रेड-बिस्किट — उस चीज़ के लिए बिल्कुल सटीक नाम जो किंवदंती के मुताबिक़ सूखी ब्रेड के रूप में शुरू होकर बिस्किट बन गई। यह नाम सूरत के बाज़ारों में मिलने वाली कई संस्कृतियों की भी याद दिलाता है — फ़ारसी, अफ़ग़ान, पारसी, यूरोपीय और गुजराती।
नानख़टाई कैसे बनती है?
क्लासिक नानख़टाई में बहुत थोड़ी चीज़ें लगती हैं:
- आटा — मैदा, गेहूँ का आटा, बेसन या इनका मिश्रण; कुछ नुस्ख़ों में कुरकुरेपन के लिए थोड़ी सूजी भी
- घी — मुँह में घुल जाने वाले टेक्सचर की असली चाबी
- पिसी चीनी (या कुछ तरीक़ों में गुड़)
- इलायची, कभी-कभी जायफल भी
- चुटकी भर बेकिंग सोडा या बेकिंग पाउडर
- ऊपर सजाने के लिए पिस्ता, बादाम या केसर
तरीक़ा आसान है, पर धीरज माँगता है:
- घी और चीनी को हल्का और फूला हुआ होने तक फेंटा जाता है।
- आटा और इलायची मिलाकर नरम आटा गूँधा जाता है — न पानी, न अंडा।
- छोटी-छोटी गोलियाँ बनाकर ऊपर मेवा या केसर का धागा लगाया जाता है।
- मध्यम तापमान पर तब तक बेक किया जाता है जब तक ऊपर दरारें न पड़ जाएँ और नीचे से हल्का सुनहरा रंग न आ जाए।
ऊपर की दरारें अच्छी नानख़टाई की पहचान हैं: इसका मतलब है कि आटे में घी भरपूर था और धीमी आँच पर यह ठीक से फूलकर फटा।
आज की नानख़टाई
आज नानख़टाई भारतीय चाय के साथ और त्योहारों के तोहफ़ों में, ख़ासकर दिवाली पर, एक ज़रूरी चीज़ बन चुकी है। बहुत से परिवार इसे घर पर बेक करते हैं, और हर बेकरी का बेसन-आटे का अपना अनुपात और भुरभुरेपन का अपना अंदाज़ होता है।
नानख़टाई के बारे में झटपट जवाब
क्या नानख़टाई में अंडा होता है? पारंपरिक नानख़टाई बिना अंडे की होती है — इसकी भरपूर रिचनेस घी से आती है।
नानख़टाई और शॉर्टब्रेड में क्या फ़र्क़ है? दोनों भुरभुरे और भरपूर बिस्किट हैं, लेकिन नानख़टाई में मक्खन की जगह घी और इलायची होती है, और आटे में अक्सर बेसन भी मिलाया जाता है।
DeshÉ की नानख़टाई
जामनगर में DeshÉ पर हम शुद्ध घी से छोटे बैच में चार स्वादों की नानख़टाई बेक करते हैं: इलायची, केसर पिस्ता, आटा और गुड़ और चॉकलेट चिप। ताज़ा डिब्बा चाहिए तो हमें एक पूछताछ भेजिए — हम बताएँगे कि ओवन से अगला बैच कब निकल रहा है।
लोकप्रिय क़िस्सों के मुताबिक़ नानख़टाई की शुरुआत 16वीं–17वीं सदी में सूरत में हुई, जब डच व्यापारियों की छोड़ी बेकरी एक पारसी बेकर ने संभाली।
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